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Saturday,01 May , 2021
PALWAL NEWS. 1 MAY 2021 : सिविल सर्जन डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि कोविड-19 के दृष्टिïगत जिलावासियों को बहुत सचेत रहने की जरुरत है। कि कोविड महामारी के इस दौर में घबराना नहीं है और सबको मिलकर इसका सामना करना है और सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों का पालन करना है। कोविड महामारी के इस दौर में कोई भी डॉक्टर और फ्रंटलाइन वर्कर्स सभी मिलकर कार्य कर रहे है। दुनिया भर में काम कर रहे भारतीय डॉक्टर और नर्स मुख्य सीमावर्ती लोग हैं जो इस घातक कोविड-19 के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं। इससे बहुत कुशलता से निपट रहे हैं। डॉक्टर और स्वास्थ्य कार्यकर्ता कभी पीछे नहीं हटेंगे और लड़ाई लडक़र जीत हासिल करेंगे। सब सुरक्षित और एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखकर इस लडाई को जीतेंगे ।
सिविल सर्जन डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादातर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत है। ऐसे में मरीजों के लिए प्रोन पोजीशन ऑक्सीजेनेशन तकनीक 80 प्रतिशत तक कारगर है। हर चिकित्सा प्रणाली के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रोन पोजीशन को अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी बताया है। सांस लेने में तकलीफ होने पर इस अवस्था में 40 मिनट लेट कर ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है।
सिविल सर्जन डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि पेट के बल लेटने से वेंटीलेशन परफ्यूजन इंडेक्स में सुधार आता है। डॉक्टरों ने कोरोना काल में कोविड के सांस लेने में दिक्कत आने वाले मरीजों के लिए तकनीक को जरूर आजमाने की सलाह दी है। प्रोन पोजिशन एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम में इस्तेमाल की जाती है। एआरडीएस होने से फेफड़ों के निचले हिस्से में पानी आ जाता है। पीठ के बल लेटने से फेफड़ों के निचले हिस्से की एल्वियोलाई में खून तो पहुंच जाता है, लेकिन पानी की सजह से ऑक्सीजेनेशन व कार्बन एक्साइड को निकालने के प्रोसेस में दिक्कत होती है। ऐसे हालात में ठीक तरीके से ऑक्सीजेनेशन नहीं होने पर वेंटीलेशन दिया जाता है। यानी मरीज को पेट के बल लिटा दिया जाता है। गर्दन के नीचे एक तकिया, पेट घुटनों के नीचे दो तकिया लगाते हैं और पंजों के नीचे एक तकिया। हर 6 से 8 घंटे में 40 से 45 मिनट तक ऐसा करने से मरीज को फायदा मिलता है। साधारणतया पेट के बल लिटाकर हाथों को कमर के पास भी रख सकते हैं। इस अवस्था में फेफड़ों में खून का संचार अच्छा होने लगता है। फेफड़ों में मौजूद फ्लूड इधर-उधर हो जाता है, जिससे लंग्स में ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती रहती है। ऑक्सीजन का लेवल भी नहीं गिरता है। प्रोन पोजीशन वेंटिलेशन सुरक्षित और खून में ऑक्सीजन लेवल बिगडऩे पर नियंत्रण में मददगार है। बीमारी के कारण मृत्यु दर को कम करने सहायक है। आईसीयू में भर्ती मरीजों में अच्छे परिणाम मिलते हैं। वेंटिलेटर नहीं मिलने की स्थिति में सबसे अधिक कारगर 80 प्रतिशत नतीजे वेंटिलेटर जैसे ही।
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